Thursday, November 15, 2018

Indian National Army and Veer Subhash Chandra Bose


Below are some of memorabilia in the name of this great leader and India's freedom Fighter Subhash Chandra Bose


























Tuesday, November 06, 2018

Indian History




Listen what is the importance of school books and our teachers to help us know and keep our history as real as possible.
Next generations and even us should be aware of our history to feel proud of our country 

Jai Hind. Jai Bharat


Wednesday, July 04, 2018

सोच में ताकत और चमक होनी चाहिए



Forwarded message on whatsapp but very apt and thought provoking

जैसे जैसे मेरी उम्र में वृद्धि होती गई, मुझे समझ आती गई कि अगर मैं Rs.3000 की घड़ी पहनू या Rs.30000 की दोनों समय एक जैसा ही बताएंगी ..!
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मेरे पास Rs.3000 का बैग हो या Rs.30000 का, इसके अंदर के सामान मे कोई परिवर्तन नहीं होंगा। !

मैं 300 गज के मकान में रहूं या 3000 गज के मकान में, तन्हाई का एहसास एक जैसा ही होगा।!

आख़ीर मे मुझे यह भी पता चला कि यदि मैं बिजनेस क्लास में यात्रा करू या इक्नामी क्लास, मे अपनी मंजिल पर उसी नियत समय पर ही पहुँचूँगा।!

इस लिए _ अपने बच्चों को अमीर होने के लिए प्रोत्साहित मत करो बल्कि उन्हें यह सिखाओ कि वे खुश कैसे रह सकते हैं और जब बड़े हों, तो चीजों के महत्व को देखें उसकी कीमत को नहीं _ .... ..

फ्रांस के एक वाणिज्य मंत्री का कहना था

 ब्रांडेड चीजें व्यापारिक दुनिया का सबसे बड़ा झूठ होती हैं जिनका असल उद्देश्य तो अमीरों से पैसा निकालना होता है लेकिन गरीब इससे बहुत ज्यादा प्रभावित होते हैं।

क्या यह आवश्यक है कि मैं Iphone लेकर चलूं फिरू ताकि लोग मुझे बुद्धिमान और समझदार मानें?

क्या यह आवश्यक है कि मैं रोजाना Mac या Kfc में खाऊँ ताकि लोग यह न समझें कि मैं कंजूस हूँ?

क्या यह आवश्यक है कि मैं प्रतिदिन दोस्तों के साथ उठक बैठक Downtown Cafe पर जाकर लगाया करूँ ताकि लोग यह समझें कि मैं एक रईस परिवार से हूँ?

क्या यह आवश्यक है कि मैं Gucci, Lacoste, Adidas या Nike के कपड़े पहनूं ताकि जेंटलमैन कहलाया जाऊँ?

क्या यह आवश्यक है कि मैं अपनी हर बात में दो चार अंग्रेजी शब्द शामिल करूँ ताकि सभ्य कहलाऊं?

क्या यह आवश्यक है कि मैं Adele या Rihanna को सुनूँ ताकि साबित कर सकूँ कि मैं विकसित हो चुका हूँ?

नहीं यार !!!

मेरे कपड़े तो आम दुकानों से खरीदे हुए होते हैं,

दोस्तों के साथ किसी ढाबे पर भी बैठ जाता हूँ,

भुख लगे तो किसी ठेले से  ले कर खाने मे भी कोई अपमान नहीं समझता,
अपनी सीधी सादी भाषा मे बोलता हूँ। चाहूँ तो वह सब कर सकता हूँ जो ऊपर लिखा है
लेकिन ....

मैंने ऐसे लोग भी देखे हैं जो मेरी Adidas से खरीदी गई एक कमीज की कीमत में पूरे सप्ताह भर का राशन ले सकते हैं।

मैंने ऐसे परिवार भी देखे हैं जो मेरे एक Mac बर्गर की कीमत में सारे घर का खाना बना सकते हैं।

बस मैंने यहाँ यह रहस्य पाया है कि पैसा ही सब कुछ नहीं है जो लोग किसी की बाहरी हालत से उसकी कीमत लगाते हैं वह तुरंत अपना इलाज करवाएं।
मानव मूल की असली कीमत उसकी नैतिकता, व्यवहार, मेलजोल का तरीका, सुल्ह-रहमी, सहानुभूति और भाईचारा है। ना कि उसकी मोजुदा शक्ल और सूरत ... !!!

सूर्यास्त के समय एक बार सूर्य ने सबसे पूछा, मेरी अनुपस्थिति मे मेरी जगह कौन कार्य करेगा?
समस्त विश्व मे सन्नाटा छा गया। किसी के पास कोई उत्तर नहीं था। तभी  कोने से एक आवाज आई।
दीपक ने कहा "मै हूं  ना" 
मै अपना पूरा  प्रयास  करुंगा ।
आपकी सोच  में ताकत और चमक होनी चाहिए। छोटा -बड़ा होने से फर्क  नहीं पड़ता,सोच  बड़ी  होनी चाहिए। मन के भीतर  एक दीप जलाएं और सदा मुस्कुराते रहें।।

Sunday, June 10, 2018

Population or duty??



I had several debates and discussions with my friends and relatives on claims that all the problems in India are due to population.

Here is my list of items not impacted just because India has too much population: 
  • Throwing rubbish in dustbins
  • Following the traffic signals (for vehicles)
  • Following traffic rules in general
  • Cleaning of the public places by Govt
  • Repairs and maintenance of roads
  • Giving green signal to builders to erect building on any available land they find
  • Spitting anything anywhere

Saturday, December 23, 2017

कौन थे?

जलती रही जोहर में नारियां
भेड़िये फ़िर भी मौन थे।
हमें पढाया गया अकबर'' महान,
तो फिर महाराणा प्रताप कौन थे।
सड़ती रही लाशें सड़को पर 
गांधी फिर भी मौन थे,
हमें पढ़ाया गांधी के चरखे से आजादी आयी,
तो फांसी चढ़ने वाले 25-25 साल के वो जवान कौन थे


वो रस्सी आज भी संग्रहालय में है
जिस्से गांधीजी बकरी बांधा करते थे
किन्तु वो रस्सी कहां है
जिस पे भगत सिंह , सुखदेव और राजगुरु हसते हुए झूले थे


" हालात.ए.मुल्क देख के रोया न गया...
कोशिश तो की पर मूंह ढक के सोया न गया".
जाने कितने झूले थे फाँसी पर,कितनो ने गोली खाई थी....
क्यो झूठ बोलते हो साहब, कि चरखे से आजादी आई थी....
मंगल पांडे को फाँसी
तात्या टोपे को फाँसी
रानी लक्ष्मीबाई को अंग्रेज सेना ने घेर कर मारा
भगत सिंह को फाँसी
सुखदेव को फाँसी
राजगुरु को फाँसी
चंद्रशेखर आजाद का एनकाउंटर अंग्रेज पुलिस द्वारा
सुभाषचन्द्र बोस को गायब करा दिया गया
भगवती चरण वोहरा बम विस्फोट में मृत्यु
रामप्रसाद बिस्मिल को फाँसी
अशफाकउल्लाह खान को फाँसी
रोशन सिंह को फाँसी
लाला लाजपत राय की लाठीचार्ज में मृत्यु
वीर सावरकर को कालापानी की सजा
चाफेकर बंधू (३ भाई) को फाँसी
मास्टर सूर्यसेन को फाँसी
ये तो कुछ ही नाम है जिन्होंने स्वतन्त्रता संग्राम और इस देश की आजादी में अपना सर्वोच्च बलिदान दिया
कई वीर ऐसे है हम और आप जिनका नाम तक नहीं जानते 
एक बात समझ में आज तक नही आई कि भगवान ने गांधी और नेहरु को ऐसे कौन से कवच-कुण्डंल दिये थे
जिसकी वजह से अग्रेंजो ने इन दोनो को फाँसी तो दूर, कभी एक लाठी तक नही मारी...
उपर से यह दोनों भारत के बापू और चाचा बन गए और इनकी पीढ़ियाँ आज भी पूरे देश के उपर अपना पेंटेंट समझती है

लेखक अज्ञात